बेर केर से ये रिश्ते

हम उनको एक करते हैं
वो हमें गैर करते हैं,

बेर केर से ये रिश्ते
कहां किस ओर चलते हैं?

लुटा है आदमी अक्सर
कई हैं लूटने वाले,

इसी लूटने लूटने का
कई व्यापार करते हैं।


लहू पीना है जिसका
लगाके इलज़ाम उसी पे,

ऐसी हैवानियत कर
वो बड़ा होशियार कहते है।

कई लाशों के ऊपर हैं
कई किलों की दीवारें,

कई खूनी पिशाचों की
लोग जयकार करतें हैं।

Poet Reetesh




Comments