वक़्त के इस दौर में

क्या बचाना है
बेचना है क्या,
जरूर से इसका 
पता रहे।

थोड़ा सम्मान जाए भले

दिल बचे आत्मा रहे।


कहीं चीजों की चाह में

आदमी खुद को न बेच दे।


वक़्त के इस बेसुध दौर में,

होश का वास्ता रहे।

Poet Reetesh

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