नाच रहा हर कण कण

आनंद से भीगा
 भीगा तन मन

मस्तक में दिया सा
 जलता गुनगुन

अंदर भारी 
भारी सा मन

बाहर इक
हल्का हल्कापन।


सारे तन में
एक झुनझुन झुनझुन

नाच रहा
हर कण कण सुन सुन।

मधुर गम्भीर सा 
दिल और धड़कन

है सब स्थिर
 नाचे जग जीवन।

Poet Reetesh


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