आजादी की महक
ये खूबसूरत लम्हा
उजली उजली दिशाएं,
बदन को सहलाती हवा,
वक़्त रोक लेना चाहता हूं मैं।।
आकाश में उड़ते पंछी,
चहकने की आवाज़।
आजादी की महक,
हवा से खेलते पेड़ो के पत्ते।
ना कल की चिंता
ना आज का डर
बस यहीं
इसे रोक लेना चाहता हूं मैं।।
... Poet Reetesh
(30 aug 2013
Mnit jaipur)
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