इतिहास इस महल का

जहाँ एक ज़माने में
चूमे गये होंठ,
छाती जकड़ी गई आवेशालिंगन में।
 

पुरानी भीतों की बास मिली हुई
इक महक तुम्हारे चुम्बन की
 

और उस कहानी का अंगारी अंग-स्पर्श
गया, मृत हुआ!
हमने पहले कह रखा था महल गिर
जाएगा।


ख़ूबसूरत कमरों में कई बार,
हमारी आँखों के सामने,
हमारे विद्रोह के बावजूद,
बलात्कार किए गए
नक्षीदार कक्षों में।
 

भोले निर्व्याज नयन हिरनी-से
मासूम चेहरे
निर्दोष तन-बदन
दैत्यों की बाँहों के शिकंजों में
 

इतने अधिक
इतने अधिक जकड़े गए

कि जकड़े ही जाने के
सिकुड़ते हुए घेरे में वे तन-मन
दबलते-पिघलते हुए एक भाफ बन गए।


एक कुहरे की मेह,
एक धूमैला भूत,
एक देह-हीन पुकार,
कमरे के भीतर और इर्द-गिर्द
चक्कर लगाने लगी।


आत्म-चैतन्य के प्रकाश भूत बन गए

भूत-बाधा-ग्रस्त कमरों कोअन्ध-श्याम साँय-साँय
हमने बताई तो
दण्ड हमीं को मिला,
बाग़ी करार दिए गए,
चाँटा हमीं को पड़ा,
बन्द तहख़ाने में--कुओं में फेंके गए,
हमीं लोग!!


क्योंकि हमें ज्ञान था,
ज्ञान अपराध बना।


महल के दूसरे
और-और कमरों में कई रहस्य-
तकिए के नीचे पिस्तौल,
गुप्त ड्रॉअर,
गद्दियों के अन्दर छिपाए-सिए गए
ख़ून-रंगे पत्र, महत्त्वपूर्ण!!
अजीब कुछ फोटो!!
रहस्य-पुरुष छायाएँ
लिखती हैं
इतिहास इस महल का।

 

 

~Muktibodh(Ek vidrohi ka atmkathan)

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