क्या गिरेगा पेड़ वो

क्या गिरेगा पेड़ वो
इन आंधियों से,

जिसकी जड़ में 
गांव भर की प्रार्थना है।

इन अंधेरों को अभी
रखना नज़र में

क्योंकि इनमें 
सूर्य की संभावना है।

इक परिंदा भूल से
आ गया था एक दिन,

अब परिंदो को 
मेरा घर घोसला लगे।

ओढ़कर वो अंधेरा 
जिए उम्र भर

पास जिनके तमाम
रौशनी रहे।

ये खेत तो मेरा
पहले ही झील में था,

इन बादलों से पूछो
तुम क्यों यहां पे आ बसे।

अश्वघोश

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