रहीम के दोहे
जो रहीम गति दीप की,
कुल कपूत गति सोय ।
बारे उजियारे लगे,
बढ़े अँधेरो होय ।।
बड़े बड़ाई नहिं करैं,
बड़े न बोलें बोल ।
रहिमन हिरा कब कहै,
लाख टका मेरो मोल ।।
तरुवर फल नहिं खात है,
सरवर पियहि न पान ।
कहि रहीम परकाज हित,
संपति सँचहि सुजान ।।
जो बड़ेन को लघु कहे,
नहिं रहीम घटि जांहि ।
गिरिधर मुरलीधर कहे,
कुछ दुख मानत नांहि ।।
rahimdas
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