जो सब तुम जान जाते हो
बात की बात होती है
वक़्त हालात होते हैं,
वहीं तुम मात खाते हो
जो सब तुम जान जाते हो।।
वो जनाता है इसलिए
डरो तुम और परेशां हो,
इसी भय के दुष्चक्र में
पछताते घबराते हो।।
नहीं सब ध्यान देने योग्य
नहीं प्रतिक्रिया के काबिल
पचाना भी उसे सीखो
जो कुछ तुम जान जाते हो।
Poet Reetesh
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