चाहे जहां जाऊं

क्यों न 
सब छोड़ दूं?

और कहीं 
खो जाऊं।

मौजों का साथ करूं।

गम को भूल जाऊं।।

पुरानी बातें
सब छोड़ के।

एक अलग नई
कहानी बनाऊं।।

मेरी ही नज़र से
ये पता है मुझे।

हर घड़ी नयी है
चाहे जहां जाऊं।।

... Poet Reetesh
 17/9/13

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