वही संगीत मुझको


आग निकले या की 
जल की धार निकले

राग मधुमय या
करूं चित्कार निकले,

चीरकर जो संग की छाती
निकलती है विकलता,

बस वही संगीत मुझको।

मैं सदा संसार से लड़ता रहा हूं
बस यही है हार मुझको 
जीत मुझको।

HRB

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