आज़ादी से ऊंचा मूल्य नहीं

जुल्मी शासन
डरी जनता,
देते कहीं
मूल्य दिखाई नहीं।

क्रांति करो
करो उपवास,
गुलामी से बड़ी
बुराई नहीं।

आज़ादी से ऊंचा 
मूल्य नहीं,
मन से बड़ी
सफाई नहीं।।

Poet Reetesh

Comments