जीवन चक्र

समाज विचार देता है

विचार ज्ञान जगाता है।


ज्ञान से अज्ञानता दिखती है

अज्ञानता से भय लगता है।


भय कमजोर करता है।

कमजोरी से दुख आता है।


दुख दर्द बनता है

दर्द भाव जगाता है।


भाव से दया आती है

दया से प्रेम आता है।


प्रेम से भक्ति जगती है

भक्ति से परम मिलता है।।

Poet Reetesh

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