ऐ मेरे जहां के देवता

ऐ मेरे जहां के देवता,

ये तेरा वितान अजीब है।

तेरी वेदना में है रौशनी,
 
तेरी आन बान अजीब है।।

यहां मुद्दतों से खड़ा हूं मैं,

यही सोचता की कहां रहूं।

यहां सबके घर में दुकान है,

यहां हर मकान अजीब है।।

तेरे अस्क जलते दिए,

तेरी मुस्कराहटें चांदनी।

मैं तुझे कभी समझ न सका, 

तेरी दास्तां अजीब है।।

...ज्ञान प्रकाश विवेक 
हरियाणा


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