गांव में बचपन में

याद आता है
गांव में, बचपन में,

कुछ शीशम के पेड़,
जो मैंने ही लगाए थे।

बड़े छोटे छोटे से थे,
आज वे मुझसे बड़े हो गए
कौन सी बात उठाई उन्हें?

बादलों की धूप,
कि पंछियों के गीत,
लहराईयां हवा की
या बारिश सा मीत।

या उनकी ही स्थिरता
जमीन आसमां के बीच।

जो चमक है, खनक है
घुंघरू सी पत्तियों के बीच।

इक सुंदर सा साथ पाता हूं
अपनी तन्हाइयों के बीच।।

...poet Reetesh


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