मीराबाई
आलि री मेरे नैना बान पड़ी
कद की ठाड़ी पन्थ निहारूँ
अपने भवन खड़ी
चित चढ़ी मेरे माधुरी मूरत
उर बिच आन अड़ी
मीरा गिरधर हाथ बिकानी
लोग कहे बिगड़ी!!
............मन रे पासि हरि के चरन।
सुभग सीतल कमल- कोमल
त्रिविध - ज्वाला- हरन।...
जिन चरन ध्रुव अटल कींन्हों राखि अपनी सरन।
जिन चरन प्रभु परस लनिहों तरी गौतम धरनि।
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