तुझे खोज ही लेते श्याम




तू है राधा अपने कृष्ण की
 

तिरा कोई भी होता नाम !
 

मुरली तिरे भीतर बजती
 

किस वन करती विश्राम


या कोई सिंहासन विराजती
 

तुझे खोज ही लेते श्याम!
 

जिस संग भी फेरे डालती
 

संजोग में थे घनश्याम
 

क्या मोल तू मन का माँगती
 

बिकना था तुझे बेदाम


बंसी की मधुर तानों से
बसना था ये सूना धाम 

तिरा रंग भी कौन सा अपना

मोहन का भी एक ही काम
 

गिरधर आके भी गए और
मन माला है वही नाम!
 

जोगन का पता भी क्या हो
कब सुबह हुई कब शाम!


...Parvin Shakir

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