कर्मयोगी
वो पैसे के लिए
नहीं मरता,
कर्मयोगी। कायर नहीं होता,
वो छुट्टी पर जाता है।
वो भागता नहीं।
बड़े बड़े सम्राट
कुछ नहीं उसके आगे।
वो दीन दिखता है
पर उससे आगे कुछ नहीं।।
वो जमीन सा है
आसमान भी,
वो भक्त भी है
भगवान भी,
वो सर्वज्ञ भी है
अनजान भी,
वो इन्सान भी है
शक्तिमान भी।।
...poet Reetesh
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