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Showing posts from November, 2020

सौन्दर्य

लौट कर आना

कर्मयोगी

तुझे खोज ही लेते श्याम

गांव में बचपन में

Mujhe aur kya chahiye

निर्वेद शून्य सत्य

हम कहाँ नहीं

फुलझडियां

मीराबाई

क्या ग़नीमत नहीं ये आज़ादी

ये भी तो स्वच्छ भारत है

आलिंगन विरह-मिलन का

बड़ा साड़ा समझता है

ऐ मेरे जहां के देवता

यशोधरा

कोशिश करो जीने की

धूल धूल

एक नयन था मेरा