वॉरियर कबाड़ी वाला

Go  corona Go


वो कबाड़ खरीदता है

जान हथेली पे लेके,

तपती धूप में

भूखे प्यासे अनवरत ।

वो डरता नहीं है कोरोना से

मास्क की भी सुध नहीं रखता,

उसे मा भारती की सेवा करनी है 

कोई मामूली बात है।

देश के तमाम लोग

कबाड़ का ही तो धंधा करते हैं,

कबाड़ रिसाइकिल कर

स्वच्छ भारत बनाते हैं।

आज गुलाम मजदूर दौड़ रहे

कबाड़ी वाला आत्मनिर्भर है,

अर्थवयवस्था की लाज बचाओ

रीसायकल करो।।

Poet Reetesh
 

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