छोटे बच्चे की दुनिया

छोटा बच्चा अगर उड़ना ही चाहता,
तो इसी क्षण स्वर्ग तक उडान भर सकता था
ये भी नहीं की उसे कुछ नहीं चाहिए, इसलिए हमें नहीं छोड़ता
उसे अपना सिर माँ की गोद में रख के आराम करना पसंद है
और वो एक पल भी माँ से दूरी नहीं सहना चाहता।                                            

बच्चा हर तरह के शब्द जानता है
जो चंद लोग ही इस धरती पे समझ पाएंगे
ये भी नहीं की उसे कुछ नहीं कहना, इसलिए कभी बोलना नहीं चाहता
मगर वो माँ के होंठो से उसके शब्द सीखना चाहता है
इसलिए वो इतना मासूम दिखता है।

बच्चे के पास सोने चांदी के ढेर थे
फिर भी वो भिखारी की तरह इस धरती पे आया
ये भी नहीं की यूँ ही वो भेष बदल के आ गया
ये छोटा प्यारा भिछुक बिलकुल बेचारा होने का बहाना करता है
इसलिए की वो माँ के प्रेम रूपी धन की भीख मांग सके।

बच्चा हर बंधन से बिल्कुल आजाद था
चाँद तारों की जमीं पे
ये भी नहीं की यूँ ही उसने अपनी आज़ादी छोड़ दी
उसे पता है की माँ के दिल के छोटे से कोने में भी अपार मस्ती है
और माँ की प्यारी बांहों में क़ैद होने की मिठास आज़ादी से भी बढ़के है।

बच्चे ने रोना कभी नहीं जाना
वो परमानन्द के जगत में रहा है
ये भी नहीं की यूँ ही उसने आंसू बहाना चुना है
जैसे वो अपनी प्यारी मुस्कान से माँ का दिल अपनी ओर खींचता है
फिर जरा-जरा सी मुसीबतों पे उसका छोटा-छोटा रुदन, दया और प्रेम का दुगुना बंधन बांधता है।

 - टैगोर की कविता का हिंदी अनुवाद

Comments

  1. इट्स गणतंत्र दिवस सो आल्सो टू हमारी "भारत माता ".. मुबारक हो...

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